अभिमंत्रित बिच्छू बूटी एवं जड़ के लाभ
अभिमंत्रित बिच्छू बूटी और जड़ धारण करने से शनि जनित कष्टों से मुक्ति मिलती है। यह शनि दशा, साढ़े साती, ढैय्या तथा अन्य शनि दोषों में विशेष रूप से लाभकारी है। शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है, जिससे वे प्रसन्न होकर अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
शनिदेव: न्याय के देवता
नवग्रहों में शनिदेव को कर्मफलदाता एवं न्याय का देवता माना जाता है। वे अत्यंत क्रूर भी हो सकते हैं और शीघ्र प्रसन्न भी। उनकी कृपा से मनुष्य को राज्य प्राप्त होता है, जबकि कोप से सब कुछ छिन भी सकता है। शनि के प्रभाव से न केवल मनुष्य, बल्कि देवता, यक्ष, किन्नर एवं जीव-जंतु भी भयभीत रहते हैं।
बिच्छू बूटी या उसकी जड़ को अभिमंत्रित कर धारण करने से शनि से उत्पन्न समस्त दोषों का निवारण होता है। इससे शनि दशा, साढ़े साती, ढैय्या आदि के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं और शनिदेव की अनुकंपा प्राप्त होती है।
बिच्छू बूटी के स्वास्थ्य लाभ
बिच्छू बूटी अनेक रोगों में चमत्कारिक प्रभाव रखती है, जैसे:
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जोड़ों का दर्द एवं गठिया
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मूत्र संक्रमण (यूरिनल इंफेक्शन)
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त्वचा संबंधी विकार एवं एलर्जी
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हृदय रोग एवं उच्च रक्तचाप
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लिवर की समस्याएं
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प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया
बिच्छू बूटी के गुण:
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एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाली)
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रक्तशोधक (ब्लड प्यूरिफायर)
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प्राकृतिक एंटीहिस्टामाइन
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हृदय रोगों से बचाव (रक्त के थक्के, एथेरोस्क्लेरोसिस)
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लिवर स्वास्थ्य में सहायक
बिच्छू घास की जड़ के फायदे
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सूजन एवं पित्त दोष में राहत
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पाचन संबंधी समस्याओं में उपयोगी
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मलेरिया एवं बुखार में प्रभावी
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मोच, हड्डी टूटने या दरार पर प्लास्टर के रूप में उपयोग
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महिलाओं की समस्याएं (मासिक धर्म, PCOD, गर्भावस्था संबंधी विकार)
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आर्थराइटिस, पीलिया, खांसी-जुकाम में लाभ
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मोटापा कम करने में सहायक
शनि से उत्पन्न रोग
ज्योतिष के अनुसार, शनि के अशुभ प्रभाव से निम्नलिखित रोग हो सकते हैं:
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हड्डियों से जुड़े रोग (गठिया, ऑस्टियोपोरोसिस, हड्डी का कैंसर)
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वात रोग (लकवा, पैरालिसिस, अस्थमा)
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मानसिक विकार (पागलपन, डिप्रेशन)
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लिवर एवं पाचन संबंधी समस्याएं
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तंत्रिका तंत्र विकार (पार्किंसंस, मल्टीपल स्केलेरोसिस)
शनि शरीर के मुख्य अंगों जैसे हड्डियों, मांसपेशियों, जोड़ों, आंतों एवं तंत्रिकाओं को प्रभावित करते हैं। उनकी अशुभ स्थिति से पैरों के रोग, मलाशय संबंधी विकार एवं गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
बिच्छू जड़ से शनि शांति के उपाय
आयुर्वेद एवं ज्योतिष दोनों में बिच्छू जड़ को अत्यंत प्रभावी माना गया है। लाल किताब के अनुसार:
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ताबीज विधि: अभिमंत्रित बिच्छू जड़ को चांदी के ताबीज में धारण करने से शनि दोष शांत होते हैं।
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शुभ मुहूर्त: शुक्ल पक्ष के शनिवार को पुष्य नक्षत्र में जड़ उखाड़कर लाना चाहिए।
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अंगूठी विधि: बिच्छू जड़ से निर्मित अंगूठी धारण करने से शनि का प्रकोप कम होता है।
इस प्रकार, बिच्छू बूटी एवं जड़ का सही विधि से उपयोग कर शनि के दुष्प्रभावों से मुक्ति पाई जा सकती है तथा स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त किए जा सकते हैं।
